*जीवन में जो भी करो,*
*पूरे समर्पण के साथ करो...।*
*प्रेम करो तो मीरा की तरह....*
*प्रतीक्षा करो तो शबरी की तरह...*
*भक्ति करो तो हनुमान की तरह...*
*शिष्य बनो तो अर्जुन के समान...*
*और*
*मित्र बनो तो स्वयं कृष्ण के समान*
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कभी कभी "गुस्सा" मुस्कुराहट से भी ज्यादा 'स्पेशल' होता है, क्योंकि "स्माईल" तो सबके लिए होती है...
मगर "गुस्सा" सिर्फ उसके लिए होता है....
जिसे हम कभी "खोना" नहीं चाहते.,,
❤❤
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