Tuesday, 31 January 2017

सम्बन्ध

*सम्बन्ध को जोड़ना*
      *एक कला है,*
          *लेकिन*
*"सम्बन्ध को निभाना"*
     *एक साधना है*

*जिंदगी मे हम कितने सही और कितने गलत है, ये सिर्फ दो ही शक्स जानते है..*

*"ईश्वर "और अपनी "अंतरआत्मा"*

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*तकदीर के खेल से*
                   *नाराज नहीं होते*
*जिंदगी में कभी*
                    *उदास नहीं होते*
*हाथों किं लक़ीरों पे*
                 *यक़ीन मत करना*
*तकदीर तो उनकी भी होती हैं ,*
        *जिन के हाथ ही नहीं होतi

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*मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैँ , हासिल कहाँ नसीब से होती हैं !*

*मगर वहाँ तूफान भी हार जाते हैं , जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ !*

*भरोसा ” ईश्वर ” पर है, तो जो लिखा है तकदीर में, वो ही पाओगे !*

*मगर , भरोसा अगर ” खुद ” पर है ,तो ईश्वर वही लिखेगा , जो आप चाहोगे !!!*

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