Sunday, 27 November 2016

MANJILE


" मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।।

हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता..

अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ...

तो बेशक कहना...

जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी

और जो भी पाया वो रब की मेहेरबानी थी!

खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में
ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नही....
��जन्म अपने हाथ में नहीं ;
मरना अपने हाथ में नहीं ;��
��पर जीवन को अपने तरीके से जीना अपने हाथ में होता है�� ;

��मस्ती करो मुस्कुराते रहो ;
सबके दिलों में जगह बनाते रहो ।I
जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं
और
जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से,
इस "आरंभ और अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है..

.......................................................
��
     निस्वार्थ भाव से कर्म करो       
              क्योंकि.....
           इस धरा का...
           इस धरा पर...                
      सब धरा रह जायेगा।

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